सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को दशकों से समाज की प्रगति का प्रमुख पैमाना माना जाता रहा है. मगर, GDP के बढ़ते आँकड़ों के बीच, उन राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्थाओं के प्रति लोगों में गहरी निराशा भी बढ़ रही है, जिनका उद्देश्य जनता की सेवा करना है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब समय आ गया है कि हम GDP को मापने का नया तरीक़ा खोजें कि वास्तव में क्या पहलू मायने रखते हैं?