यह रिपोर्ट उस समय तैयार की गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसे उपायों पर विचार करे, जिनसे किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों और नाबालिग के गर्भवती होने के मामलों को पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत अपने-आप अपराध न माना जाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया