एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिमी देशों से भारत के व्यापार में कमी आ सकती है। साथ ही क्रूड सहित दूसरे कमोडिटीज की सप्लाई चेन पर इस लड़ाई का बड़ा असर पड़ेगा। एक दशक पहले पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार में ईरान और इजरायल की (दोनो को मिलाकर और जीसीसी को छोड़कर) करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी थी। 2024 तक यह घटकर 20 फीसदी पर आ गई