फ़्राँस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्राँ ने मंगलवार को कहा कि दुनिया के सामने एक स्पष्ट विकल्प है: क्या हम जंगल के क़ानून की ओर वापिस जाकर जीना चाहते हैं, या फिर हम एक सभ्य अन्तरराष्ट्रीय समाज में रहना चाहते हैं. उन्होंने मंगलवार को यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट में जुटे प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही.
उन्होंने कहा कि फ़्राँस, संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय व्यवस्था, दोनों में नई स्फूर्ति भरने के लिए संकल्पित है ताकि साझा चुनौतियों का एक साथ मिलकर सामना किया जा सके.
उन्होंने वैश्विक संकटों और युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि हम पराजयवादी सोच के आगे घुटने नहीं टेकेंगे.
फ़्रेंच नेता के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून वास्तविकताओं को बयाँ नहीं करते हैं, बल्कि स्वीकार्य बर्ताव की सीमाओं को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि 20वीं शताब्दी के जिन सबक़ को भुला दिया गया है, उन्हें युद्ध अपराधों और बर्बरता के नए युग की लहर में देखा जा सकता है.
“जिनीवा सन्धि को तार-तार किया जा रहा है.” राष्ट्रपति मैक्राँ ने सूडान में अल फ़शर, ग़ाज़ा और अन्य मानवीय संकटों के दौरान हुए विध्वंस पर क्षोभ प्रकट किया.
“न्याय के बिना शान्ति स्थापना नहीं हो सकती है.” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि फ़्राँस, अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा.
“हम दंडहीनता की इस नई व्यवस्था को बिलकुल भी स्वीकार नहीं कर सकते हैं, जिसे कुछ लोग खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.”
फ़्राँस के नेता ने सुरक्षा परिषद को और अधिक कारगर बनाने के लिए सुधारों को अपना समर्थन दिया. इन सुधारों में नए सदस्यों को शामिल किए जाने का भी सुझाव है, विशेष रूप से अफ़्रीकी प्रतिनिधित्व को.
साथ ही, परिषद के पास अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के सामूहिक उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई का भी अधिकार होगा.
राष्ट्रपति मैक्राँ ने उत्तर व दक्षिण के बीच की दरारों को पाटने की पैरवी की, जोकि जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य व विकास से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने के लिए अहम है.
उनके अनुसार, इसके लिए यह ज़रूरी होगा कि साझा इतिहास, सांस्कृतिक सम्बन्धों व नुक़सान की भरपाई के लिए न्याय व्यवस्था पर संवाद सुनिश्चित किया जाए.
फ़्राँसीसी नेता ने सम्प्रभुता के विषय में दोहरे मानकों को अपनाए जाने की कठोर निन्दा की. “कितनी बार हमने सुना है कि योरोप में लोगों की सम्प्रभुता मायने रखती है, लेकिन जब बात मध्य पूर्व व अफ़्रीका की हो तो इसे नज़रअन्दाज़ भी किया जा सकता है.”
उन्होंने रूसी आक्रमण से जूझ रहे यूक्रेन के लिए अपने समर्थन को दोहराया और मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थित होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही की आज़ादी बहाल करने पर बल दिया.
राष्ट्रपति मैक्राँ ने ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में फ़लस्तीनियों के लिए अपने समर्थन पर बल देते हुए कहा कि कुछ का दावा है कि ग़ाज़ा में शान्ति हासिल हो गई है, लेकिन फिर भी मानवीय सहायता गलियारों ने अभी मूर्त रूप नहीं लिया है.
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) में निहित ख़तरों का भी उल्लेख किया, विशेष रूप से एआई टैक्नॉलॉजी के नियामन, संचालन व्यवस्था पर, जिसमें विश्व आबादी के एक बड़े हिस्से व देशों की कोई आवाज़ नहीं है.
राष्ट्रपति मैक्राँ ने कहा कि यह विषय केवल अमेरिका व चीन, और चंद निजी पक्षों पर नहीं छोड़ा जा सकता है.
उनके अनुसार, बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है, एक ऐसी टैक्नॉलॉजी पर जोकि राष्ट्रों, अस्पतालों और बैंकों की सुरक्षा को ख़तरे में डाल सकती है.