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मार्केट में शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन बढ़ा है। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स का फोकस क्विक प्राइस मूवमेंट्स पर रहता है। इसमें अक्सर बड़ी संख्या में लो-वैल्यू स्टॉक्स शामिल होते हैं। इससे वॉल्यूम तो बढ़ जाता है लेकिन टर्नओवर (रुपये) में अपेक्षाकृत कम इजाफा होता है