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इस प्लान के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और ऑडिटर्स को फ्रॉड के शुरुआती संकेत मिलते ही इस बारे में रेगुलेटर्स को बताना होगा। चूंकि, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और ऑडिटर्स लगातार कंपनी के मैनेजमेंट के संपर्क में रहते हैं, जिससे उन्हें फ्रॉड के संकेत सबसे पहले मिलने लगते हैं