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अक्टूबर 2024 में RBI ने कहा था कि उसने इन कंपनियों की प्राइसिंग पॉलिसी में कुछ गंभीर चिंताएं देखी है। RBI ने पाया कि ये कंपनियां अपने वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) और कॉस्ट ऑफ फंड्स पर चार्ज किए गए इंटरेस्ट स्प्रेड को जरूरत से ज्यादा रख रही थीं, जो रेगुलेटरी गाइडलाइन के अनुरूप नहीं था