(खबरें अब आसान भाषा में)
मिस-सेलिंग की समस्या घटने के बजाय बढ़ रही है। इससे सिर्फ आम लोगों को नुकसान नहीं होता। इससे बैंकों की प्रतिष्ठा को भी चोट पहुंचती है और उन्हें कानूनी मामलों में उलझना पड़ता है। इससे फाइनेंशियल इनक्लूजन यानी आबादी के बड़े हिस्से को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाने के मकसद का मजाक बनता है