यह 2010 की शुरुआत की बात है, 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बमुश्किल डेढ़ साल बाद, जब इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में एक जासूस की खबर तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ राजीव माथुर तक पहुंची। ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल ही रहा था, एक और इंटेलिजेंस फेलियर एक ऐसा जोखिम था, जिसे भारत बर्दाश्त नहीं कर सकता था