पाकिस्तान को जून 2018 में ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया गया था, और अक्टूबर 2022 में इसे हटाए जाने तक “कड़ी निगरानी” का सामना करना पड़ा। इस लिस्ट में शामिल होने से FDI और कैपिटल फ्लो पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि कारोबार को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इससे पाकिस्तान से भारत में, खासकर जम्मू-कश्मीर में अवैध फिंडिंग को कम करने में मदद मिली है।