(खबरें अब आसान भाषा में)
को-लोकेशन मामले में कुछ ब्रोकर्स पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने अपने सर्वर्स फिजिकल रूप से एनएसई के सर्वर्स के करीब रखे थे, जिससे उन्हें सेबी के सर्वर के डेटा का एक्सेस जल्द मिला था। इससे उन्हें दूसरे ब्रोकर्स के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमाने में मदद मिली थी