2016 में दिए एक इंटरव्यू में नाना ने बताया था कि एक किसान की आत्महत्या और उसके परिवार की टीवी पर दिखाई गई स्थिति ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। उन्होंने बताया कि उनके पास उस समय करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये थे। उन्होंने मकरंद अनासपुरे से उन परिवारों तक यह पैसा पहुंचाने को कहा, जिन्होंने अपने घर के कमाने वाले सदस्य को खो दिया था। लेकिन बाद में नाना को लगा कि सिर्फ आर्थिक मदद करना पर्याप्त नहीं है। किसानों की असली समस्या सूखा, पानी और खेती से जुड़ी परेशानियां हैं। इसी सोच के साथ NAAM Foundation ने पानी संरक्षण, गांवों में जलस्रोतों के पुनर्जीवन और ग्रामीण विकास पर भी काम शुरू किया।