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Mahakumbh 2025: आर्थिक तंगी के कारण 57 वर्षीय गौरी महाकुंभ नहीं जा सकीं, तो उन्होंने अपने आंगन में 40 फीट गहरा कुआं खोद डाला, इसे अपनी ‘गंगा’ मान लिया। रोज़ 6-8 घंटे मेहनत कर उन्होंने दो महीने में इसे पूरा किया। प्रशासन ने रोका, लेकिन हौसले से जीती बाज़ी। उनका संकल्प आत्मनिर्भरता की मिसाल है