जांच में सामने आया कि राहत राशि बांटते समय आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को फर्जी तरीके से बाढ़ पीड़ित दिखाया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गलत तरीके से उनके खातों में पैसा भेजा जा सके। इस मामले में तहसीलदार कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और बिचौलियों की भी मिलीभगत होने का शक है। अब तक अमिता सिंह तोमर समेत 25 पटवारियों और 100 से ज़्यादा लोगों को इस घोटाले में आरोपी बनाया जा चुका है