Israel Iran War: ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह अली खामेनेई को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है कि वो कोमा है। कई बार चर्चा ये भी हुई कि उनकी मौत हो गई। सोशल मीडिया पर लगातार ये दावा किया जा रहा है कि उन्हें जहर देकर मार दिया गया है। हालांकि, इन सब के बीच खामेनेई की एक वीडियो और तस्वीर सामने आई है। ईरान सुप्रीम लेबनान में ईरान के राजदूत मोजताबा अमानी से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं।
दोनों के बीच मीटिंग की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आई है, उसमें खामेनेई और मोजताबा बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, इसकी कोई पुष्टि नहीं हो सकी है कि ये वीडियो हाल की है, या फिर पुरानी। सोशल मीडिया पर चर्चा इस बात की भी हो रही है कि ईरान सुप्रीम ने अपने बेटे मोजताबा खामेनेई को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। हालांकि, इसे लेकर भी कोई आधिकारिक बयान नहीं दी गई है।
पोस्ट में तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा गया कि इस्लामिक क्रांति के नेता अयोतोल्लाह खामेनेई ने सीनियर राजदूत अमानी से आज दोपहर में मुकाकात की। वह अपनी दैनिक मीटिंग के बीच में उनसे मुलाकात की। बता दें, ये तस्वीर 17 नवंबर को रात 10 बजे के करीब शेयर की गई।
क्या अमेरिका में ट्रंप की वापसी ने बढ़ा दी ईरान की चिंता
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव समाप्त हो चुका है। अमेरिका को नया राष्ट्रपति भी मिल गया है औन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर जनवरी 2025 में शपथग्रहण करेंगे। इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान की चिंता बढ़ती नजर आ रही है। बता दें, अमेरिका और ईरान के बीच ट्रंप के शासन में दूरियां काफी बढ़ गई थी, जो अबतक बरकरार है। ट्रंप ने ही ईरान के साथ न्यूक्लीयर डील खत्म की थी।
युद्ध के बीच आईएईए प्रमुख का ईरान दौरा
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख ने बीते 14 नवबर को चेतावनी दी कि ईरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर ‘बातचीत और कूटनीति की गुंजाइश कम होती जा रही है’ क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है और डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद व्हाइट हाउस में वापस आ रहे हैं।
आईएईए प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक अपने निरीक्षकों की पहुंच बहाल करने और इस पर अब भी लंबित प्रश्नों के जवाब के प्रयास में तेहरान का दौरा कर रहे हैं। उनकी पिछली यात्राओं के दौरान उन्हें सीमित सफलता मिली थी। दरअसल, ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल के दौरान विश्व शक्तियों के साथ इस्लामिक गणराज्य के परमाणु समझौते से अमेरिका को एकतरफा रूप से हटा लिया था।
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