ओवरहॉल के दौरान तोप की पूरी तकनीकी जांच की गई, जरूरी जगहों पर सटीक मरम्मत की गई और अहम हिस्सों को दुरुस्त किया गया। इसमें तोप का बैरल, रिकॉइल सिस्टम और फायर-कंट्रोल से जुड़े पुर्जे शामिल थे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, इस सावधानी से की गई प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि लंबे समय तक फायरिंग के दौरान तोप की सटीकता, संतुलन और मजबूती बनी रहे