देरी मुख्य रूप से फॉर्म्स में अहम स्ट्रक्चरल बदलावों और बैकएंड सिस्टम में चल रहे तकनीकी अपग्रेड के कारण है। ITR-2 और ITR-3 यूटिलिटीज यानि कि फॉर्म अभी भी इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव नहीं हैं। ध्यान रहे कि रिफंड पर टैक्सपेयर्स को हासिल होने वाला ब्याज, अन्य स्रोतों से आय माना जाता है और यह टैक्सेबल होता है