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इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 43(5) में डेरिवेटिव ट्रांजेक्शंस को स्पेकुलेटिव इनकम के दायरे में नहीं रखा गया है। इस वजह से F&O से होने वाले प्रॉफिट या लॉस को नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है भले ही इसमें डिलीवरी (शेयरों की) नहीं होती है