Bengal Chunav 2026: बंगाली लोग महंगाई, टूटी सड़कें, लेट होती ट्रेनें, इंडस्ट्री का पलायन, राजनीतिक यू-टर्न- यहां तक कि बेंगलुरु से लौटे रिश्तेदारों की नई-नई खाने की आदतें भी सहन कर सकते हैं। लेकिन अगर मछली और मांस की उपलब्धता पर सवाल उठने लगे, तो हालात बदल सकते हैं। तब बंगाल यह दिखाने में देर नहीं लगाएगा कि सहनशीलता की भी एक सीमा होती है