इस अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया विमान उत्तर प्रदेश के कानपुर से उड़ान भरा और दिल्ली पहुंचा। दिल्ली सरकार के नेतृत्व में यह पहल IIT कानपुर के सहयोग से की गई। इस प्रक्रिया में क्लाउड-सीडिंग फ्लेयर्स से लेस विमान को नमी से भरे बादलों में उड़ाकर सिल्वर आयोडाइड और साल्ट बेस्ड कंपाउंड जैसे पार्टिकलों को फैलाना शामिल था