अनुज चौधरी ने कहा, “भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बीच हमारा अनुमान है कि रुपया कमजोर बना रहेगा। हालांकि, कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बीच अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को लेकर चर्चा के बीच अमेरिकी डॉलर में कमजोरी से रुपये को निचले स्तरों पर सहारा मिल सकता है