जब धन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है तो महत्वाकांक्षाएँ परवान चढ़ती हैं, ऐसी योजनाएँ लागू करना आसान होता है जिनसे रोज़गार उत्पन्न होते हैं, जीवन यापन की लागत कम होती है, स्वास्थ्य बेहतर होते हैं, समुदायों की हिफ़ाज़त होती है और हर किसी के लिए, एक अधिक शक्तिशाली व समृद्ध पृथ्वी की सम्भावना प्रबल होती है.