आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह और गोवा के अध्यक्ष अमित पालेकर ने BJP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गोवा में नौकरियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इस घोटाले में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की पत्नी का नाम भी सामने आया है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी कहा था कि नौकरियों के बदले पैसे लिए गए हैं। इसके साथ ही अमित पालेकर ने सवाल उठाया कि अगर BJP का कोई नेता इसमें शामिल नहीं है, तो सरकार न्यायिक जांच से क्यों डर रही है। संजय सिंह ने गोवा में बेरोजगारी संकट पर भी चिंता जताई और कहा कि गोवा की BJP सरकार ने पिछले दस वर्षों में रोजगार को भ्रष्टाचार का साधन बना दिया है। उन्होंने कहा, ‘रिश्वत के बदले नौकरियां बेची गई हैं और यह घोटाला उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है, जिसमें मुख्यमंत्री की पत्नी और उनके करीबी लोग भी शामिल हैं।’ इससे पहले, एक महिला जो एक मंत्री के घर गई थी, रिश्वतखोरी में फंस गई और इसके बाद मंत्री बर्खास्त हुए। संजय सिंह ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तारियां हुईं, आप ने इस मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की है।
‘पैसों के बदले नौकरी घोटाले’ का मामला
गोवा में एक बार फिर ‘पैसों के बदले नौकरी घोटाले’ ने जोर पकड़ा हुआ है, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने मोर्चा खोला है सिर्फ मोर्चा ही नहीं इस पूरे मामले पर संजय सिंह ने पीसी कर दावा किया कि इस घोटाले में सीएम सावंत की पत्नी, उनके सरकार में मंत्री और BJP नेताओं शामिल हैं।
गोवा में कैश-फॉर-जॉब्स घोटाले ने राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हाल ही में किसी भी राजनीतिक संलिप्तता से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने दावा किया, “जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।” लेकिन जांच पूरी होने से पहले दिए गए इस बयान ने विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे दिया है।
सीएम प्रमोद सावंत के बयान पर विवाद
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का बयान तब आया जब जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, ‘किसी को नहीं बख्शा जाएगा।’ हालांकि, उनके इस बयान पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने सावंत पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं, खुद ही कैश-फॉर-जॉब्स घोटाले में क्लीन चिट देने का प्रयास कर रहे हैं। यह दिखाता है कि जांच कितनी पारदर्शी होगी। हर कोई जानता है कि गिरफ्तार हुए लोगों के राजनीतिक संबंध हैं।’ उनका कहना है कि जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक लिंक को खारिज करना खुद में संदेह पैदा करता है।
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