डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी। नाराजगी व्यक्त करते हुए BJP नेता ने कहा, "उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में बदला जा रहा है।"