कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ बड़ी हो रही पहली पीढ़ी के बच्चे, इसके भविष्य से जुड़े फ़ैसलों में अपनी आवाज़ चाहते हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा है कि उनकी राय को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जाना चाहिए.
न्यूयॉर्क में AI के दौर में बच्चों की सुरक्षा पर एक उच्चस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए वोल्कर टर्क ने कहा, “आज के बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ बड़े होने वाली पहली पीढ़ी हैं, फिर भी उनकी राय अक्सर सबसे बाद में पूछी जाती है.”
उन्होंने कहा कि AI के विकास और इस्तेमाल से जुड़े फ़ैसलों में बच्चों को शुरू से शामिल किया जाना चाहिए, न कि खानापूर्ति के लिए बाद में उनकी राय ली जाए.
यूएन महासभा की जनरल डिबेट से इतर आयोजित इस बैठक की सह-अध्यक्षता फ्रांस, स्पेन, केनया और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने की.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने अपने साझीदारों के साथ मिलकर 49 देशों में एक हज़ार से अधिक बच्चों की राय जानने के लिए एक सर्वेक्षण किया.
बच्चों ने वास्तविक लोगों की नक़ली तस्वीरें बनाए जाने, निजी डेटा के इस्तेमाल व दुरुपयोग, रचनात्मकता पर पड़ने वाले असर, और इस आशंका को लेकर चिन्ता जताई कि AI परिवार, दोस्तों, शिक्षकों या थेरेपिस्ट के साथ वास्तविक रिश्तों की जगह ले सकता है.
उनका सन्देश स्पष्ट था: फ़ैसले लिए जाने से पहले उनकी बात सुनी जाए, न कि बाद में केवल उनके नतीजे बताए जाएँ.
वोल्कर टर्क ने कहा कि बाल अधिकारों पर कन्वेंशन AI पर भी पूरी तरह लागू होती है.
उनके अनुसार, AI प्रणालियाँ विकसित करने वाली कम्पनियों को उत्पाद बाज़ार में लाने से पहले मानवाधिकार जोखिम आकलन करना चाहिए. साथ ही, पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
उन्होंने सरकारों से भी अधिक मज़बूत कार्रवाई का आग्रह करते हुए कहा, “स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएँ पर्याप्त नहीं हैं.”
यह बैठक जुलाई में जिनीवा में शुरू किए गए 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में बाल अधिकार और संरक्षण गठबन्धन' के प्रयासों को आगे बढ़ाती है.
इस पहल में सरकारें, यूएन एजेंसियाँ, तकनीकी कम्पनियाँ, नागरिक समाज संगठन और विशेषज्ञ शामिल हैं. अब तक 17 देश इससे जुड़ चुके हैं.
इसका उद्देश्य है कि बच्चों के जीवन को प्रभावित करने वाली AI प्रणालियों को तैयार करने, लागू करने और उनकी निगरानी की प्रक्रिया में बच्चों की भी सीधी भागेदारी हो.
वोल्कर टर्क ने कहा, “AI के क्षेत्र में भी बच्चों के अधिकार उतने ही लागू होते हैं, जितने अन्य क्षेत्रों में.”
UNICEF की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने कहा कि बच्चे AI के नियम तय होने का इन्तज़ार नहीं कर रहे हैं. वे पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, और इससे उन्हें सीखने, रचनात्मकता तथा सूचना व सेवाओं तक पहुँच के नए अवसर मिल रहे हैं.
मगर इससे जुड़े जोखिम भी गम्भीर हैं.
यूनीसेफ़ के शोध के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 11 देशों के कम से कम 12 लाख बच्चों की तस्वीरों या छवियों को AI की मदद से यौन प्रकृति की तस्वीरों में बदला गया.
कैथरीन रसैल ने कहा कि AI बच्चों की एक पूरी पीढ़ी को पहले ही नुक़सान पहुँचा रहा है, और इस सच्चाई को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता.