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किम जोंग उन जिन घोड़ों पर सवार थे, उन्हें उत्तर कोरिया की विरासत का भी प्रतीक माना जाता है। दरअसल, 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद इस देश ने आर्थिक सुधार को लेकर प्रयास शुरू किए जिसका नाम पौराणिक पंखों वाले घोड़े चोलिमा पर रखा था।