हालांकि, सिर्फ ब्याज दर कम होने से लोन सस्ता नहीं हो जाता। प्रोसेसिंग फीस और दूसरी लागतें भी देखनी चाहिए। RBI के नियमों के तहत मिलने वाले की फैक्ट स्टेटमेंट (KFS) में सालाना कुल लागत यानी APR की जानकारी दी जाती है। इसमें ब्याज के साथ लोन से जुड़े दूसरे शुल्क भी शामिल होते हैं। इसलिए लोन फाइनल करने से पहले इस स्टेटमेंट को जरूर पढ़ें।