पहले बात इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस की। इसके लिए ₹859 करोड़ रखे गए हैं। कोई कंपनी अगर नई कंटेनर फैक्ट्री लगाने या अपनी मौजूदा क्षमता बढ़ाने के लिए टर्म लोन यानी कैपिटल लोन लेती है, तो उस पर उसे हर साल 3% की ब्याज छूट मिलेगी। मान लीजिए किसी कंपनी ने फैक्ट्री के लिए बैंक से बड़ा कर्ज लिया है, तो ब्याज का बोझ हल्का होगा और प्रोजेक्ट का हिसाब बेहतर बैठेगा। नई फैक्ट्री को ग्रीनफील्ड और मौजूदा क्षमता के विस्तार को ब्राउनफील्ड कहा जाता है, और दोनों इस मदद के दायरे में हैं।