इस समय बाजार में जिस चीज की कमी हो गई है वह है धैर्य की। लोगों को उम्मीद थी कि बाजार एकदम गति पकड़ेगा तो भागता ही चला जाएगा। लेकिन हम जिओपॉलिटिकल डेवलपमेंट से अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते। हम जिस स्थिति पर हम खड़े हैं उसमें हमें इस बात को मान लेना चाहिए कि इतने विषम माइक्रोइकोनमिक स्थिति होने के बावजूद हमारी इकॉनमी अच्छी कर रही है और हमारे तिमाही नतीजे बहुत अच्छे हो रहे हैं। जो जिओपॉलिटिकल स्थिति है क्या वो बहुत लंबे समय तक चलेगी और अगर चलेगी तो हमें धैर्य रखने की जरूरत है। फंडामेंटली हमारा मार्केट पहले से ज्यादा स्ट्रांग होता जा रहा है। फंडामेंटल पहले से ज्यादा स्ट्रांग हो रहे हैं। ऐसे में धैर्य की सख्त जरूरत है।