हम जो भोजन खाते हैं, जिस जल को पीते हैं और जिस हवा में साँस लेते हैं, वे सभी हमारी पृथ्वी पर जैवविविधता के उपहार हैं, मगर इसके बावजूद, “जीवन को पोषित करने वाले इस वृक्ष से हर दिन एक शाखा को काटा जा रहा है”. यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने विश्व नेताओं के नाम अपने सम्बोधन में प्रकृति के साथ समरसतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने का आहवान किया है.
आर्मिनिया की राजधानी येरेवान में अगले सप्ताह 'यूएन जैवविविधता सम्मेलन' (कॉप17) आरम्भ हो रहा है, जिससे ठीक पहले महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को वहाँ आयोजित नेताओं की एक शिखर बैठक को सम्बोधित किया.
यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि विश्व भर में 10 लाख से अधिक प्रजातियों पर विलुप्त होने का जोखिम है, और यह रुझान हमें एक ऐसी दिशा में ले जा सकता है, जहाँ रह पाना सम्भव नहीं होगा.
उन्होंने बताया कि पृथ्वी आपस में जुड़े हुए तीन बड़े संकटों से जूझ रही है: प्रदूषण, जैवविविधता हानि और जलवायु परिवर्तन. बदलती जलवायु, पशुओं द्वारा अत्यधिक घास चरने, ज़रूरत से ज़्यादा उर्वरकों व कीटनाशकों के इस्तेमाल से स्थिति बिगड़ रही है.
जैवविविधता का अर्थ, पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवन और उनके प्राकृतिक परिवेश में विविधता से है. जैसेकि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े, बैक्टीरिया, अन्य सूक्ष्मजीव, वन, नदियाँ, घास के मैदान, रेगिस्तान, भोजन के अलग-अलग प्रकार.
यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि चार वर्ष पहले, जैवविविधता संरक्षण के लिए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक फ़्रेमवर्क पर सहमति बनी थी, जिसने देशों को क़दम उठाने के लिए प्रेरित किया.
विश्व भर में कुल भूमि, अन्तर्देशीय जल (inland water), तटीय इलाक़ों और महासागरों के कम से कम 30 फ़ीसदी हिस्से का संरक्षण सुनिश्चित करना और 2050 तक प्रकृति के साथ समरसतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना, जिसके लिए, 2030 तक तत्काल क़दम भी उठाए जाने हैं.
90 प्रतिशत से अधिक देशों ने राष्ट्रीय जैवविविधता लक्ष्य तय किए हैं, 50 फ़ीसदी से अधिक ने उन्हें हासिल करने के लिए रोडमैप भी तैयार कर लिए हैं. 2022 के बाद से अब तक, 13 लाख वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त भूमि और 60 लाख वर्ग किलोमीटर महासागर को औपचारिक रूप से संरक्षित किया गया है.
यूएन प्रमुख ने कहा कि प्रगति, असमान है और बहुत ही धीमी है. “यदि देश अपने मौजूदा संकल्पों को पूरा कर भी लेते हैं, तो 2030 तक केवल 26 फ़ीसदी स्थलीय (terrestrial) पारिस्थितिकी तंत्रों और 12 प्रतिशत समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों को ही संरक्षित किया जा सकेगा,” जोकि फ़्रेमवर्क के लक्ष्य से बहुत कम है.
वहीं, प्रकृति को नुक़सान पहुँचाने वाली गतिविधियों को मिलने वाली सब्सिडी में कटौती करने, उपायों के लिए तकनीकी क्षमता, सहयोग व डेटा जुटाने में भी कमी है.
महासचिव गुटेरेश ने येरेवान में आयोजित शिखर बैठक के दौरान घोषणापत्र पारित किए जाने का स्वागत किया, जिसमें जैवविविधता को सरकारी नीतियों, बजट व नियामन व्यवस्था में शामिल करने का संकल्प लिया गया है.
उन्होंने देशों की सरकारों से जैवविविधता संरक्षण के लिए नेतृत्व दर्शाने का अनुरोध करते हुए ऐसी नीतियाँ अपनाने की पैरवी की है, जिनसे प्रकृति के विध्वंस की बजाय उसे पोषित किया जाए.