तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म का वीएफएक्स इसके बजट के हिसाब से अच्छा है। सिनेमैटोग्राफी में कुछ खूबसूरत शॉट्स देखने को मिलते हैं। खास बात यह है कि फिल्म का बड़ा हिस्सा एक ही लोकेशन पर शूट होने के बावजूद प्रस्तुति में यूनिकनेस बनाए रखने की कोशिश की गई है। निर्देशक बालाजी मोहन इस सीमित सेटिंग को कहानी के अनुरूप इस्तेमाल करते हैं। हालांकि फिल्म की रफ्तार कुछ जगहों पर बेहतर हो सकती थी। एडिटिंग में थोड़ी और कसावट इसे ज्यादा इंप्रेसिव बना सकती थी। वहीं म्यूजिक जुबान पर चढ़ने वाला नहीं है।