फ़ैशन जगत में नएपन, ख़ूबसूरती और बेहतरीन कारीगरी के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति दायित्व का मेल भी अहम होता जा रहा है, ताकि टिकाऊ इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके. भारत में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और साझीदार संगठनों की पहल, ‘सर्कुलर डिज़ाइन चैलेंज’ प्रतियोगिता इसी सोच को एक नई उड़ान दे रही है, जो फ़ैशन डिज़ाइनर को ऐसे ही रचनात्मक प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करती है.
हाल ही में, नई दिल्ली में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय ‘सर्कुलर डिज़ाइन चैलेंज 2026’ में पारम्परिक कारीगरी और आधुनिक फ़ैशन का अनूठा मेल देखने को मिला, जिसमें कचरा घटाने और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल से टिकाऊ फ़ैशन की नई सम्भावनाएँ पेश करने वाले दो डिज़ाइन संग्रहों को सम्मानित किया गया.
सर्कुलर डिज़ाइन (circular design) या अर्थव्यवस्था से तात्पर्य, ऐसी व्यवस्था से है जिसमें सामान का इस्तेमाल अधिक से अधिक समय तक किया जाए, कचरा कम पैदा हो और पुराने संसाधनों को दोबारा उपयोग में लाकर फिर नए उत्पाद बनाए जा सकें.
भारत में संयुक्त राष्ट्र के साथ साझेदारी में 'सर्कुलर डिज़ाइन' प्रतियोगिता, पर्यावरण के प्रति जागरूक रचनात्मकता को बढ़ावा देकर, एक हरित एवं अधिक टिकाऊ भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है.
इसका उद्देश्य, फ़ैशन उद्योग में कचरे और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और फ़ैशन उद्योग को पर्यावरण अनुकुल समाधान अपनाने के लिए प्रेरित करना है.
‘भारत–फ़्राँस नवाचार वर्ष 2026’ के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता के आठवें संस्करण का समापन 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में फ़्राँसीसी दूतावास में हुआ, जिसे यूएन कार्यालय, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और लैक्मे फ़ैशन वीक के साथ साझेदारी में आयोजित किया गया.
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर ने टिकाऊ विकास में वस्त्र और फ़ैशन उद्योग की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि "भारत के वस्त्र और फ़ैशन उद्योग में दुनिया को संसाधनों के पुन: उपयोग पर आधारित व्यवस्था की ओर ले जाने की अपार सम्भावनाएँ हैं."
स्टेफ़ान प्रीज़नर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र, भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय और उद्योग जगत के साथ मिलकर कार्बन उत्सर्जन घटाने और परिपत्र अर्थव्यवस्था (circular economy) को बढ़ावा देने के लिए प्रयासों में जुटा है.
उन्होंने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि, "इन डिज़ाइनरों को मिला सम्मान, टिकाऊ उत्पादन और उपभोग के नए समाधान तलाशने के लिए रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की अहमियत दर्शाता है."
विश्व भर से 220 से अधिक आवेदन मिलने के बाद, कई दौर की चयन प्रक्रिया के ज़रिए प्रतिभाशाली डिज़ाइनरों को चुना गया.
निर्णायक समिति ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन, उनकी रचनात्मकता, नवाचार, सामग्रियों के इस्तेमाल, डिज़ाइन को बड़े पैमाने पर अपनाने की सम्भावना और टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप उनके काम के आधार पर किया.
अन्तिम दौर में पहुँचे प्रतिभागियों ने अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने अपने संग्रह पेश किए. इस दौरान, उन्हें विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और उद्योग जगत से सम्वाद का अवसर भी मिला.
सौरभ मौर्य के ब्रैंड ‘Margn’ ने आधुनिक फ़ैशन में नई सामग्रियों और कारीगरी के अभिनव इस्तेमाल से प्रतियोगिता को अपने नाम किया. उनके संग्रह में सामग्री के चयन से लेकर कपड़े तैयार करने तक, हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया.
वहीं, अनिल पाडिया के ब्रैंड ‘Yoshita 1967’ को उपविजेता चुना गया. उनके संग्रह ने साँस्कृतिक विरासत और पारम्परिक शिल्पकला को आधुनिक अन्दाज़ में पेश किया.
वर्ष 2018 में शुरू हुई ‘सर्कुलर डिज़ाइन चुनौती’, उभरते डिज़ाइनरों और उद्यमियों को अपने नए विचार आगे बढ़ाने और फ़ैशन उद्योग में कचरा घटाने के अवसरों के लिए एक अहम मंच के रूप में उभरी है.