इसराइल में 7 अक्टूबर 2023 को हुए भयावह आतंकी हमलों और उसके बाद ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सैन्य कार्रवाई को हाल ही में तीन वर्ष पूरे हुए हैं. मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस अवधि में हज़ारों लोगों की मौत हुई है, अनगिनत ज़िन्दगियाँ हमेशा बदल गई हैं, और घर व समुदाय तबाह हुए हैं. उन्होंने इस दुखद पड़ाव पर इसराइल व फ़लस्तीन के बीच शान्ति स्थापना के लिए प्रयास तेज़ करने का आग्रह किया है.
ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सैन्य कार्रवाई, पश्चिमी तट में इमारतों के ध्वस्तीकरण और हिंसक घटनाओं के बीच गुरूवार को सुरक्षा परिषद की बैठक हुई है, जिसमें क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में स्थिति पर चर्चा हुई.
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए यूएन के कार्यवाहक विशेष समन्वयक, रमीज़ अलअकबरोव ने येरूशलम से 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद को ग़ाज़ा व पश्चिमी तट में हालात से अवगत कराया.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में फिर युद्ध भड़कने का जोखिम पहले से अधिक है और इसे हर क़ीमत पर टाला जाना होगा. “फ़लस्तीनी और इसराइली नागरिक, अल्प अवधि के उपायों से कहीं अधिक के हक़दार हैं.”
“उन्हें शान्ति के लिए एक विश्वसनीय मार्ग मिलना चाहिए और अन्तत:, इस टकराव के अन्त का. लेकिन इसे वे अकेले हासिल नहीं कर सकते हैं.”
विशेष समन्वयक ने बताया कि सर्दी के मौसम से पहले समय बीता जा रहा है. 9.5 लाख लोग ऐसे इलाक़ों में रह रहे हैं, जहाँ बाढ़ का ख़तरा है. लोगों ने चार हज़ार से अधिक इमारतों में शरण ली हुई है, लेकिन उनके ढह जाने का जोखिम है.
रमीज़ अलअकबरोव ने ग़ाज़ा में शान्ति स्थापित करने के लिए सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 को लागू करने के लिए हो रहे प्रयासों का स्वागत किया.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में हिंसक टकराव के अन्त के लिए व्यापक योजना को पूर्ण रूप से अमल में लाया जाना होगा, जिसके तहत हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों को हथियार डालने होंगे.
साथ ही, ग़ाज़ा से इसराइली सैन्य बलों की वापसी और अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती होगी. विशेष समन्वयक ने कहा कि ग़ाज़ा में प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति को अपना दायित्व निभाने के लिए समर्थ बनाना होगा.
“हमारे सामने स्पष्ट विकल्प हैं. ग़ाज़ा में युद्धविराम को वास्तविक पुनर्बहाली और एक स्थाई राजनैतिक समाधान की बुनियाद बनाना होगा. क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में अवैध क़ब्ज़े का अन्त किया जाना होगा,” ताकि दो-राष्ट्र समाधान के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके.