संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वैश्विक महामारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए पुख़्ता तैयारियों पर लक्षित, एक राजनैतिक घोषणापत्र को पारित किया है, लेकिन इस सिलसिले में सर्वसम्मति नहीं बन पाई. जनरल असेम्बली में सोमवार को लाए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 153 सदस्य देशों ने मतदान किया जबकि विरोध में तीन वोट (अर्जेन्टीना, इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका) डाले गए. दो देशों (न्यूज़ीलैंड और पैराग्वे) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
चिली के प्रतिनिधि ने कई देशों की साझा राय व्यक्त करते हुए कहा, "कोई भी देश, चाहे वह कितना भी बड़ा या कितना भी तैयार क्यों न हो, अकेले ऐसी चुनौती का सामना नहीं कर सकता, जो सीमाओं में बँधी नहीं है."
महासभा में पारित यह राजनैतिक घोषणापत्र क़ानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है. इसमें विज्ञान, समानता और मानवाधिकारों के सम्मान को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने का आहवान किया गया है.
इस घोषणापत्र में, पिछले वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ऐतिहासिक महामारी समझौते को अपनाए जाने का भी स्वागत किया गया है.
25 सितम्बर को यूएन मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में, इस घोषणापत्र को सर्वसम्मति से पारित किया जाना था, मगर अमेरिका और कुछ अन्य देशों की आपत्तियों के कारण ऐसा नहीं हो सका और इसे फिर से महासभा में पेश किया गया.
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WHO के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, "महामारी की रोकथाम, उससे निपटने की तैयारी और कार्रवाई के लिए एक साथ मिलकर काम करने के लिए सदस्य देशों की इस मज़बूत प्रतिबद्धता का हम स्वागत करते हैं."
"कोविड-19 महामारी के बाद से दुनिया ने काफ़ी प्रगति की है. अब ज़रूरी है कि देश अपने संकल्पों को पूरा करें."
उन्होंने बीमारियों की वजह बनने वाले रोगाणुओं के नमूनों और उनसे जुड़ी जानकारी को जल्द से जल्द साझा करने की व्यवस्था पर बातचीत पूरी करने का आग्रह किया.
इस व्यवस्था को अन्तिम रूप दिए जाने के बाद ही, WHO महामारी समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी. इसके बाद देश इसकी पुष्टि कर सकेंगे, ताकि यह समझौता अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के रूप में लागू हो सके.
इस व्यवस्था के तहत देशों द्वारा, रोगजनकों (pathogens) के नमूने और आनुवंशिक आँकड़े साझा किए जाएंगे, जिसके बदले उन्हें इनसे विकसित होने वाले टीकों, दवाओं और परीक्षण के साधनों में हिस्सेदारी मिलेगी.
मगर विकासशील देशों और कुछ सम्पन्न योरोपीय देशों व अमेरिका के बीच मतभेदों के कारण बातचीत अटकी हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के 194 सदस्य देशों की विश्व स्वास्थ्य सभा अगले वर्ष मई में इस मुद्दे पर फिर चर्चा करेगी.
अमेरिका ने इससे पहले भी घोषणापत्र के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी. उसका कहना था कि इसमें कुछ ऐसे मुद्दों का ज़िक्र है, जिन पर देशों के बीच सहमति नहीं है.
महासभा की बैठक का सारांश यहाँ उपलब्ध है.
इस बीच, एक अन्य पहल के तहत, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को अपने महामारी निगरानी केन्द्र के लिए पाँच वर्षीय रणनीति शुरू की है, जिसका लक्ष्य 24 घंटे के भीतर संक्रामक रोगों के नए प्रकोप का पता लगाना है.
कोविड-19 महामारी के दौरान वर्ष 2021 में स्थापित इस केन्द्र का उद्देश्य सभी देशों को स्वास्थ्य सम्बन्धी नए ख़तरों की जल्द पहचान करने और उनसे निपटने में मदद देना है, ताकि बीमारियों को महामारी का रूप लेने या दूसरे देशों में फैलने से पहले ही रोका जा सके.
इस पहल के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.