अगस्त महीने में विनाशकारी बाढ़ से हुई तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा नेपाल एक बार फिर से नई आपदा की चपेट में है. देश के केन्द्रीय गोरख़ा ज़िले में रविवार को अचानक आई बाढ़, अपने साथ घरों व पुलों को बहा ले गई है, जिसके बाद यूएन एजेंसियाँ सैकड़ों प्रभावितों तक मदद पहुँचाने के लिए तेज़ी से प्रयासों में जुट गई हैं.
समाचार माध्यमों के अनुसार, कम से कम पाँच लोग अब भी लापता हैं और 95 को बचा लिया गया है. औचक बाढ़ के लिए भूस्खलन को ज़िम्मेदार बताया गया है जिसकी वजह से पहले बूढ़ी गंडकी नदी का मार्ग अवरुद्ध हुआ और फिर यह बाँध टूटने और पानी के तेज़ प्रवाह से गाँवों में घरों व पुलों को भारी नुक़सान हुआ है.
बाढ़ की वजह से कुछ समुदायों तक राहत पहुँचाने का रास्ता कठिन हो गया है. जान बचाने के लिए अपने घर छोड़कर भागे लोग अब वापिस लौटने में भय महसूस कर रहे हैं.
नेपाल में यह बाढ़ एक ऐसे समय में आई है जब कुछ ही सप्ताह पहले, नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर एक ग्लेशियर के ध्वस्त हो जाने से अचानक, भयावह बाढ़ आ गई थी जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की जान गई, और लगभग पाँच हज़ार लापता हो गए.
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीम ने सोशल मीडिया पर अपने सन्देश में बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से प्रभावित हुए परिवारों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है. “हम नेपाल के साथ खड़े हैं.”
संयुक्त राष्ट्र की टीम, राष्ट्रीय आपदा जोखिम व प्रबन्धन एजेंसियों के साथ मिलकर इस आपदा में अपने घर खो देने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में जुटी है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, पहले से तैयार भोजन से लदे तीन ट्रक और राहत सामग्री को बाढ़-प्रभावित समुदायों की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रवाना किया गया है.
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने कहा है कि बाढ़ की वजह से मुख्य सड़कों, फ़सलों, और मवेशियों को नुक़सान पहुँचा है और इससे स्थानीय खाद्य सुरक्षा के लिए ख़तरा है.
अभी तक हुई बर्बादी का आकलन करने के लिए उन इलाक़ों में ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लिया जा रहा है, जहाँ सड़क मार्ग से पहुँच पाना सम्भव नहीं है.
बाढ़ के तेज़ बहाव से जल आपूर्ति, शिक्षा व स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर भी असर हुआ है. विस्थापित परिवारों को अब सुरक्षित आश्रय, स्वच्छ पेयजल, बाल संरक्षण और मनोसामाजिक समर्थन की आवश्यकता होगी.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), इस आपदा के असर और उससे उपजी आवश्यकताओं का आकलन करने में जुट गई है ताकि उसके अनुरूप मदद मुहैया कराई जा सके.