अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने बताया है कि जिबूती में एक नौका के डूब जाने से कम से कम 15 बच्चों समेत 109 प्रवासियों की मौत हुई है और 84 लोग अब भी लापता बताए गए हैं.
बचाव एवं तलाश अभियान जारी है. मृतकों में 52 पुरुष, 42 महिलाएँ और 15 बच्चे बताए गए हैं. समाचार माध्यमों के अनुसार, 30 और शवों के मिलने के बाद मृतक आँकड़ा 139 पर पहुँच गया है.
8-9 अक्टूबर की रात्रि को जिबूती से यमन की ओर जा रही इस नौका में 305 लोग सवार थे, मगर यह जिबूती के पास गुएहेरे नामक जलक्षेत्र में दुर्घटना का शिकार हो गई. लगभग 82 लोगों को बचा लिया गया है.
यूएन एजेंसी द्वारा इस त्रासदी से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य देखभाल, आश्रय, खाद्य सहायता और अपने परिजन के साथ सम्पर्क करने के लिए मदद दी गई है.
IOM ने इसे हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका से अरब प्रायद्वीप की ओर जाने वाले मार्ग पर अब तक की सबसे भयावह दुर्घटनाओं में बताया है.
वर्ष 2025 में, 900 से अधिक प्रवासियों की इस जलमार्ग पर या तो मौत हो गई थी, या वे लापता हो गए थे. इससे पहले, मार्च 2026 में एक नौका हादसे में 9 लोग मारे गए थे और 45 लापता थे.
हर वर्ष, हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका क्षेत्र से हज़ारों प्रवासी जिबूती से होकर यमन में बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य (strait) तक की यात्रा करते हैं, ताकि वहाँ से खाड़ी देशों में जाकर सुरक्षा, स्थिरता व रोज़गार की तलाश कर सकें.
मध्य पूर्व में व्याप्त अस्थिरता व टकराव के बावजूद, निर्धनता, असुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की वजह से बड़ी संख्य में लोग, जोखिम भरे इस सफ़र पर निकल रहे हैं.
10 सितम्बर के बाद से अब तक, यूएन एजेंसी के आँकड़े दर्शाते हैं कि इथियोपिया से 20 हज़ार से अधिक लोगों ने जिबूती का रुख़ किया है. यमन में बड़े पैमाने पर लड़ाई फिर भड़क जाने के बाद भी प्रवासियों द्वारा खाड़ी देशों में जाने की कोशिश की जा रही है.
जिबूती से यमन के तट तक की समुद्री यात्रा केवल एक जोखिम है. वहाँ पहुँचने वाले प्रवासियों को हिंसा, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, गिरफ़्तारी, शोषण व तस्करी का ख़तरा भी झेलना पड़ता है.