इस पहल के तहत, आयुष ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों के लिए छह महीने के दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम बनाए गए हैं। पहला प्रोग्राम एक्यूट केयर और इमरजेंसी सपोर्ट के लिए है, और दूसरा लाइफस्टाइल हेल्थ और वेल-बीइंग काउंसलिंग और प्रैक्टिस के लिए है। ये प्रोग्राम अस्पतालों में स्पेशलिस्ट की देखरेख में एकेडमिक और प्रैक्टिकल दोनों तरह की ट्रेनिंग देंगे। पहला प्रोग्राम इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर की जरूरतों पर फोकस करेगा। डॉक्टरों को हालत बिगड़ने के शुरुआती लक्षणों को पहचानने, सीनियर स्पेशलिस्ट को तुरंत बताने और जरूरत पड़ने पर मरीजों को सही इलाज के लिए रेफर करने जैसी स्किल्स सिखाई जाएंगी। इसके अलावा, मरीज की सुरक्षा, मेडिकल रिकॉर्ड बनाए रखने, हेल्थकेयर वर्कर्स के साथ कोऑर्डिनेट करने और अस्पताल में इमरजेंसी से जुड़े कामों में मदद करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।