फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।