ऐसी स्थिति से बचने के लिए इनवेस्टर को धीरे-धीरे अपना निवेश इक्विटी की जगह डेट या लिक्विड एसेट्स में शिफ्ट करना पड़ता है। इसकी प्रक्रिया रिटायरमेंट के 5 से 10 पहले शुरू की जा सकती है। इसके अलावा दो से तीन साल की जरूरत का पैसा लिक्विड इनवेस्टमेंट में डाल देना समझदारी है। इसका फायदा यह होता है कि बाजार में गिरावट की स्थिति में इनवेस्टर को अपने जरूरी खर्च के लिए इक्विटी कम कीमत पर बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ता है।