बाद में यहां हनुमान मंदिर की स्थापना भी हुई। भूमियाधार और बाबा की स्मृतियां भूमियाधार की शांत पहाड़ी, जंगलों से घिरा वातावरण और प्राकृतिक जलस्रोत इस स्थान को अलग पहचान देते हैं। हालांकि बाबा के जीवन से जुड़ी मौखिक परंपराओं और भक्तों की स्मृतियों में कई प्रसंग मिलते हैं, लेकिन भूमियाधार के पानी के नियमित सेवन से जुड़ा दावा मुख्यत श्रद्धालुओं की मान्यता के रूप में ही देखा जाता है। पानी से जुड़ी बाबा की एक और प्रसिद्ध मान्यता बाबा नीम करौली महाराज पर रिसर्च करने वाले कुणाल माधव मिश्रा के मुताबिक बाबा के जीवन में पानी और जलस्रोतों से जुड़े कई प्रसंग भक्तों की कथाओं में मिलते हैं।