एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर व्यक्ति प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करता है तो 50 साल के होने पर उसका फोकस रिटायरमेंट प्लानिंग पर बढ़ जाता है। रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम का स्रोत बंद हो जाता है। ऐसे में रिटायरमेंट फंड का पैसा काम आता है। भारत में ज्यादातर लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में तब सोचना शुरू करते हैं, जब काफी समय उनके हाथ से निकल चुका होता है।