पैकेट पर “जरूरी सूचना: मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा है” लिखना होगा और छह महीने के बाद ही ऊपरी खाना देने की जानकारी देनी होगी। पैकेट पर बच्चों या महिलाओं की तस्वीर नहीं लगा सकेंगे। साथ ही ‘ह्यूमनाइज्ड’, ‘मैटरनाइज्ड’, ‘कम्प्लीट फूड’ और ‘हेल्थ फूड’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं होगा। पैकेट पर बच्चे को दूध पिलाने से जुड़ी जरूरी जानकारी भी साफ तौर पर देनी होगी। बच्चे में साइड इफेक्ट दिखने पर हॉस्पिटल और डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी और गंभीर मामले में कंपनी को 48 घंटे में रिपोर्ट करनी होगी। कंपनियों को हर बैच का रिकॉर्ड रखना होगा और खराब प्रोडक्ट की पहचान कर उसे बाजार से वापस लेना होगा।