इस फैसले से यह बात सामने आती है कि ST दर्जे से जुड़े मामलों में सिर्फ प्रमाण पत्र या जन्म की पहचान ही नहीं, बल्कि संबंधित समय पर जनजातीय समुदाय से व्यक्ति के जुड़ाव को भी देखा जा सकता है। जमीन से जुड़े मामलों में यह पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कानून ST समुदाय की जमीन के हस्तांतरण पर विशेष पाबंदियां लगाता है। ये फैसला ST सर्टिफिकेट के दुरुपयोग पर बड़ी रोक लगाएगा। अब सिर्फ कागज पर ST बने रहकर जमीन खरीदने या नौकरी में आरक्षण लेने का खेल नहीं चलेगा। आपको अपनी संस्कृति से जुड़ाव साबित करना ही होगा।