मामला तब बदल गया, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट में लगाए गए मेडिकल दस्तावेजों पर सवाल उठाने शुरू किए। खास तौर पर Shroff Eye Centre के नाम और लेटरहेड वाले दस्तावेज चर्चा में आ गए। इसके बाद अस्पताल की ओर से एक सार्वजनिक चेतावनी सामने आई। अस्पताल ने कहा कि किसी ने कथित तौर पर उसके लेटरहेड का इस्तेमाल कर फर्जी मरीज रिकॉर्ड, प्रिस्क्रिप्शन और इलाज का अनुमान तैयार किया और आर्थिक सहायता के लिए लोगों तथा संस्थाओं से संपर्क किया। यही वो क्षण था, जब मदद की अपील से शुरू हुई कहानी संदेह और सवालों के घेरे में आ गई। मामला तब बदल गया,जब सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट किया की जिवन मरन सब वहीं सिमित है।