संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध की मानवीय क़ीमत लगातार बढ़ रही है. उन्होंने तीसरी युद्धकालीन सर्दी का सामना कर रहे यूक्रेनी नागरिकों और विदेशों में रूसी अधिकारियों के दबाव व धमकियों का सामना कर रहे रूसी नागरिकों की स्थिति पर गहरी चिन्ता जताई.
यूक्रेन पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग ने सुरक्षा परिषद को बताया कि बुनियादी ऊर्जा ढाँचे पर रूस के लगातार हमलों से सर्दियों से पहले यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं.
2025-2026 की भीषण सर्दियों में तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर गया था और लाखों लोगों को लम्बे समय तक बिजली और तापन प्रणालियों के बिना रहना पड़ा.
कीव में 18वीं मंज़िल पर रहने वाली 74 वर्षीय एक महिला ने आयोग को बताया कि बिजली कटने पर लिफ़्ट बन्द हो जाती थी और वह दवाओं व हीटिंग के बिना घर में फँस जाती थीं.
उन्होंने कहा, “अन्दर-बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं था. मैं ठंड और भूख से बेहाल पड़ी रहती थी, न दवा थी, न कुछ और.”
आयोग के अध्यक्ष एरिक मोसे ने कहा कि ऊर्जा ढाँचे पर लगातार हमलों से आम नागरिकों के हालात बिगड़ रहे हैं.
उन्होंने कहा, “हमें चिन्ता है कि आने वाली सर्दी का सामना करना और मुश्किल होगा.”
आयोग रूस के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में देशभक्ति और सैन्य शिक्षा को बढ़ावा देने की भी जाँच कर रहा है, जहाँ 14 वर्ष की उम्र से हथियारों का प्रशिक्षण अनिवार्य है.
विदेशी नागरिकों की भर्ती के मामले भी सामने आए हैं. कई लोगों को असैन्य रोज़गार का झाँसा देकर रूस बुलाया गया और फिर ऐसे सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया गया, जिन्हें वे पढ़ भी नहीं सकते थे.
कुछ लोग मोर्चे पर पहुँचने के कुछ ही समय बाद मारे गए, जबकि अन्य लापता, घायल या बन्दी बताए गए हैं. परिवारों के अनुसार, भर्ती करने वाले एजेंटों ने बाद में उनके फ़ोन उठाना बन्द कर दिया.
आयोग अक्टूबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा को अपनी पूरी रिपोर्ट पेश करेगा.
रूस में मानवाधिकारों पर मानवाधिकार परिषद की विशेष रैपोर्टेयर मारियाना कात्सारोवा ने जिनीवा में कहा कि मॉस्को ने ऐसी सरकारी व्यवस्था खड़ी की है, जिसका मक़सद “विदेशों में आलोचकों को डराना और दंडित करना तथा रूस में उनके परिवारों पर दबाव बनाना है.”
‘कहीं भी सुरक्षित नहीं’ शीर्षक वाली उनकी रिपोर्ट लगभग 400 दर्ज मामलों पर आधारित है. इसके अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद विदेशों में दमन तेज़ी से बढ़ा और 6.5 लाख से 9 लाख लोगों ने रूस छोड़ दिया.
ऐसी घटनाओं की दर लगभग आठ गुना बढ़ी – 2022 से पहले आठ वर्षों में 29 मामले दर्ज हुए थे, जबकि उसके बाद के तीन वर्षों में 89.
मारियाना कात्सारोवा ने निर्वासित पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ हत्याओं, ज़हर देने और हमलों के मामलों का ज़िक्र किया. उनके अनुसार, रूस सबसे अधिक इंटरपोल “रेड नोटिस” जारी करवाता है और 2024 में समीक्षा किए गए लगभग आधे नोटिस नियमों के विरुद्ध पाए गए.
उन्होंने चेचन्या के एक यातना पीड़ित का भी उल्लेख किया, जिसे रूस की प्रत्यर्पण माँग पर कज़ाख़स्तान में 18 महीने हिरासत में रखा गया. इस दौरान उसने दो बार आत्महत्या की कोशिश की और रूस लौटाए जाने पर उसे अब भी यातना या मौत का ख़तरा है.
उन्होंने कहा, “सीमापार दमन अपरिहार्य नहीं है.” उन्होंने ऐसे बाध्यकारी यूएन कन्वेंशन की माँग की, जो मेज़बान देशों को रूसी गिरफ़्तारी अनुरोधों की जाँच और जोखिम में पड़े लोगों की सुरक्षा के लिए बाध्य करे.
आयोग के सदस्य और विशेष रैपोर्टेयर, दोनों मानवाधिकार परिषद के लिए स्वतंत्र और अवैतनिक रूप से काम करते हैं. उनके विचार संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रुख़ का प्रतिनिधित्व नहीं करते.