(खबरें अब आसान भाषा में)
तापलहरें जानलेवा होती जा रही हैं, आग व आपदाएँ शहरों को तबाह कर रही हैं और बढ़ता समुद्री जलस्तर भूभागों को निगल रहा है. लेकिन एक पर्यावरणीय संकट अब भी नज़रअन्दाज़ हो रहा है – हमारे पैरों तले की भूमि का लगातार क्षरण.