सपा का सबसे ज्यादा ध्यान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर है। साल 2012 के बाद से बसपा के कमजोर होने के बाद जो दलित वोटर छिटक गए हैं, सपा उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है। इसके अलावा, यह रणनीति दलित युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे चंद्रशेखर आजाद (आजाद समाज पार्टी) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भी बनाई गई है