लातूर जिले के करसा गांव की रहने वाली 89 साल की हौसाबाई लाहाडे ने अपनी करीब 3 हेक्टेयर (लगभग 7.5 एकड़) कृषि भूमि अपने पोते और परपोते के नाम गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर कर दी थी। जब परिवार से उम्मीद टूट गई, तो हौसाबाई ने मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन्स एक्ट, 2007 के तहत सीनियर सिटिजन्स ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया और अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की