झारखंड के एक ग्रामीण आवासीय विद्यालय की 18 वर्षीया कृति, जो कभी फ़ोन, धारावाहिकों और विज्ञापनों की दुनिया में खोई रहती थी, आज अन्य लड़कियों को आत्मसम्मान और लैंगिक समानता का महत्व समझा रही है. यह बदलाव “आधा फुल” नामक उस चित्रकथा श्रृँखला से शुरू हुआ, जिसे संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के सहयोग से, किशोरों और किशोरियों में आत्मविश्वास जगाने व नुक़सानदेह लैंगिक रूढ़ियों को पहचानने के लिए तैयार किया गया है.