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इसका मतलब है कि इन 65 अधिकारियों के वोट डालने पर अभी संशय बना हुआ है, लेकिन उनके नाम भविष्य के लिए वोटर लिस्ट में वापस जोड़ने पर ट्रिब्यूनल अंतिम फैसला लेगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से की गई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत कुल 90.8 लाख से 91 लाख के बीच नाम हटाए गए थे